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पत्र-लेखन

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पत्र लिखना हर व्यक्ति को आना चाहिए और इसकी शुरुआत प्राथमिक कक्षाओं से ही हो जाती है, जहां आपको औपचारिक तथा अनौपचारिक पत्रों के बारे में जानकारी दी जाती हैI हरियाणा बोर्ड तथा केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की कक्षा 9 से लेकर 12 तक औपचारिक और अनौपचारिक पत्र पर वार्षिक परीक्षा में प्रश्न पूछे जाते हैंI हरियाणा बोर्ड में 5 अंक के अनौपचारिक और औपचारिक पत्र पर प्रश्न पूछे जाते हैंI इसी प्रकार केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की कक्षा 9वीं 10वीं 11वीं में औपचारिक और अनौपचारिक में से तथा 12वीं में औपचारिक पत्र पर 5 अंक का प्रश्न हल करने को दिया जाता है।

आपको यहां पर पत्र लिखते समय किन किन बातों का ध्यान रखना है। पत्र के कितने प्रकार होते हैं तथा उन प्रकारों को भी लिखते समय किन नियमों का आपने ध्यान रखना हैI इस सब की जानकारी यहां पर दी गई है।
हरियाणा बोर्ड की आठवीं, दसवीं तथा बारहवीं, इसी प्रकार सीबीएसई की 10वीं और 12वीं की वार्षिक परीक्षा 2022 में औपचारिक पत्र एवं अनौपचारिक पत्र पर लेखन कौशल संबंधी प्रश्न आपसे पूछा जाएगाI नीचे पत्रों के बारे में पूरी जानकारी तथा कैसे हल करना है, इसकी भी जानकारी और पत्रों के प्रारूप के बारे में सारी जानकारी आपको दी जा रही है।
पत्र-लेखन संदेश पाने और भेजने का सबसे सुलभ साधन है। पत्र के द्वारा हम दूर बैठे अपने आत्मीयों से विचारों का आदान-प्रदान कर सकते हैं, जैसे वे हमारे सम्मुख ही बैठे हों। अस्तु, पत्र ऐसा लिखना चाहिए कि पढ़ने वाला पत्र लिखने वाले के संपूर्ण विचारों को स्पष्ट रूप से समझ सके और उससे प्रभावित भी हो सके । वास्तव में पत्र, प्रेषक का सही प्रतिबिंब होना चाहिए। आजकल पत्र साहित्य का एक महत्त्वपूर्ण अंग हैI अनेक उपन्यास और कहानियाँ पत्रात्मक शैली में लिखी हुई हैं। पत्र का हमारे दैनिक व्यावहारिक जीवन में बहुत महत्त्व है।


आदर्श पत्र के निम्नलिखित गुण हैं:

  1. पत्र की भाषा सरल होनी चाहिए, जिससे पत्र पढ़ने वाला स्पष्ट रूप से पूरी-पूरी बातें समझ सके ।
  2. पत्र में लेखक को आत्मीयता का परिचय देना चाहिए।
  3. पत्र में लिखा गया विषय स्पष्ट होना चाहिए।
  4. उसके भाव अथवा अर्थ को समझने में पढ़ने वाले को कोई कठिनाई न हो।
  5. वाक्यों की संरचना उलझी हुई व दोषपूर्ण नहीं होनी चाहिए। इससे पत्र-प्रेषक के मन की बात पत्र पढ़ने वाले तक पहुँच सकेगी।
  6. पत्र में श्लेष अलंकार का प्रयोग नहीं करना चाहिए। पत्र में अनेकार्थक शब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। ये पत्र के उद्देश्य की पूर्ति में बाधक सिद्ध होते हैं।
  7. पत्र संक्षिप्त होना चाहिए। उसका अनावश्यक विस्तार पत्र के उद्देश्य को समाप्त कर देता है और पढ़ने वाला भी ऊब जाता है।

साधारण पत्र के निम्नलिखित अंग हो सकते हैं:

स्थान व तिथि
संबोधन या प्रशस्ति
शिष्टाचार
प्रमुख विषय
समाप्ति
पता
पत्र के ऊपरी सिरे पर बाई ओर किनारे पर, पत्र कहाँ से भेजा गया है और किस तिथि में लिखा गया है, के संबंध में लिखना चाहिए। सबसे पहले स्थान का नाम, फिर उसके नीचे की पंक्ति में तिथि लिखनी चाहिए।
पत्र आरंभ करने से पूर्व पत्र के बाईं ओर सब से ऊपर पत्र प्राप्तकर्ता के साथ संबंध के अनुरूप संबोधन का प्रयोग करना चाहिए।
संबोधन के उपरांत उसके नीचे ठीक मध्य में संबंध अथवा पद के अनुसार शिष्टाचारी शब्द का प्रयोग करना चाहिए। जैसे प्रणाम, नमस्ते, शुभाशीष आदि।
शिष्टाचार के उपरांत पत्र का मूल विषय, जो समाचार आदि लिखना हो, लिखना चाहिए।
पत्र के पूर्ण हो जाने पर दाईं ओर पत्र के नीचे पत्र लेखक का नाम लिखा जाना चाहिए।
लिफाफे अथवा पोस्टकार्ड पर जिसे पत्र भेजना है उसका नाम, कार्यालय का नाम, भवन क्रमांक, गली-मुहल्ले का नाम, नगर का नाम, पोस्ट ऑफिस व जिले तथा प्रदेश का नाम और पिन कोड स्पष्ट रूप से लिखना चाहिए।

पत्र-लेखन संबंधी आवश्यक नियम:

  1. लिखने योग्य विषय को पहले ही सोच-विचार कर रख लें और क्रमबद्ध कर लें।
  2. प्रेष्य के आदर-मान का पूरा ध्यान रखें।
  3. पत्र की भाषा सरल और सुबोध होनी चाहिए।
  4. विराम-चिह्नों की दृष्टि से पत्र शुद्ध हो ।
  5. पत्र सुंदर शब्दों में लिखा जाना चाहिए। काट-छाँट अशोभनीय है।
  6. पत्र संक्षिप्त होना चाहिए।
  7. गोपनीय बातें कार्ड की अपेक्षा लिफाफे में ही लिखनी चाहिए।
  8. पत्र का उत्तर लिखते समय प्रत्येक पूछी गई बात का यथाक्रम उत्तर दें।
  9. पत्र लिखने के बाद एक बार अवश्य पढ़ लें

पत्र के प्रकार:

शैली की दृष्टि से पत्र दो प्रकार के होते हैं:

1. अनौपचारिक पत्र 2. औपचारिक पत्र।

पहले अनौपचारिक पत्रों के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे

1. अनौपचारिक पत्र:

जिन लोगों से हमारे व्यक्तिगत संबंध होते हैं उन्हें हम 'अनौपचारिक पत्र' लिखते हैं। इन पत्रों में व्यक्ति अपने मन की अनुभूतियों, भावनाओं सुख-दुख की बातों आदि का उल्लेख करता है। अतः इन पत्रों को ‘व्यक्तिगत पत्र' भी कह सकते हैं। इन पत्रों की भाषा-शैली में अनौपचारिकता का पुट देखा जा सकता है।
अनौपचारिक पत्र ऐसे पत्र जो रिश्तेदारों, परिचितों, मित्रों, संबंधियों को लिखे जाते हैं, उन्हें 'अनौपचारिक पत्र' कहते हैं। इनमें बधाई पत्र, शोक पत्र, निमंत्रण पत्र सभी आ जाते हैं।

अनौपचारिक पत्र का प्रारूप:

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अनौपचारिक पत्रों के प्रकार:

अनौपचारिक पत्र निम्नलिखित प्रकार के होते हैं:

संवेदना / सहानुभूति / सांत्वना पत्र
सुझाव/ सलाह पत्र
क्षमायाचना एवं आश्वासन संबंधी पत्र
सूचना/वर्णन संबंधी पत्र
बधाई पत्र
नाराज़गी / खेद पत्र
अनुमति पत्र
बधाई पत्र
निमंत्रण पत्र
शुभकामना पत्र
आभार प्रदर्शन पत्र
निवेदन पत्र

अनौपचारिक पत्रों के संबोधन, प्रशस्ति एवं समाप्ति निर्देश

अपने से छोटे के लिए:

संबोधन

प्रशस्ति

स्वनिर्देश

चिरंजीव पौत्र, शतायु हो, तुम्हारा शुभचिन्तक दादा,
चिरंजीव प्रिय देव, प्रसन्न रहो, तुम्हारी स्नेहमयी माता,
प्रिय निकिता, सदा सुखी रहो, तुम्हारा शुभाकांक्षी पिता,
प्रिय अनुज प्रणव प्रसन्न रहो, तुम्हारा अग्रज,

अनौपचारिक पत्रों के संबोधन, प्रशस्ति एवं समाप्ति निर्देश

अपने से बड़ों के लिए :

संबोधन

प्रशस्ति

स्वनिर्देश

पूज्य अथवा आदरणीय दादा जी, सादर चरण स्पर्श, आपका पौत्र,
पूज्य अथवा आदरणीय पिता जी, सादर प्रणाम, आपका पुत्र,
पूज्य अथवा आदरणीय चाचा जी, सादर प्रणाम, आपका भतीजा,
पूज्य अथवा आदरणीय माता जी, सादर चरण स्पर्श, आपका आज्ञाकारी पुत्र,

अपने मित्र/समवयस्कों के लिए :

संबोधन

प्रशस्ति

स्वनिर्देश

प्रिय निकिता, सप्रेम नमस्ते, तुम्हारा स्नेही मित्र,
प्रिय प्रणव, सप्रेम नमस्ते, तुम्हारा ही प्रिय मित्र,

अपने से बड़े, शिक्षकों, नेताओं आदि के लिए :

संबोधन

प्रशस्ति

स्वनिर्देश

आदरणीय गुरु जी, सादर प्रणाम, आपका आज्ञाकारी शिष्य,

अनौपचारिक पत्रों के उदाहरण:

साथ ही नीचे अनौपचारिक पत्रों उदाहरण भी दिए गए हैं जिन्हें हल भी किया गया हैI यह महत्वपूर्ण पत्र हैं जो वार्षिक परीक्षा में पूछे जा सकते हैंI विद्यार्थी इन का अभ्यास करेंI

1. अपने मित्र को अपने जन्मदिन पर निमंत्रण देते हुए पत्र लिखिए । 5 अंक

82-राज नगर, पीतमपुरा
नई दिल्ली
15 दिसंबर, 2021

प्रिय मित्र प्रणव,
नमस्कार ।

तुम्हें यह जानकर अत्यंत खुशी होगी कि पिछले वर्ष की भाँति इस वर्ष भी मैं अपना जन्मदिन 29 नवंबर को मना रहा हूँ । इस अवसर पर मैंने अपने सभी मित्रों को आमंत्रित किया है। पिछले वर्ष तुम अपनी बहन की शादी के कारण मेरे जन्मदिन पर नहीं आ सके थे; पर इस बार कोई बहाना मत बनाना। तुम्हें इस बार अवश्य आना है
जन्मदिन पर प्रात: हवन होगा तथा दोपहर को भोजन की व्यवस्था है। संध्या 7 बजे हम सब जन्मदिन मनाएँगे। खूब आनंद आएगा। मेरा अनुरोध है कि तुम इस अवसर पर हमारे यहाँ 2 बजे ही उपस्थित हो जाओ। तुम्हारी उपस्थिति से यह आनंद दुगुना हो जाएगा । तुम्हारे आने की प्रतीक्षा में।

तुम्हारा अभिन्न मित्र,
देव

2. जन्मदिन पर मित्र द्वारा भेजे गए उपहार के लिए उसका आभार प्रकट करते हुए पत्र ।5 अंक

परीक्षा भवन
नई दिल्ली
दिनांक : 14 मार्च 2021

प्रिय प्रणव

सप्रेम नमस्कार!
कल मेरा जन्मदिवस था। मेरे सारे दोस्त इकट्ठे हुए। सबने बहुत मौज-मस्ती की। बस कमी रह गई तो केवल तुम्हारी। अंतिम क्षण तक सब लोग तुम्हारा इंतज़ार करते रहे। सबको लग रहा था कि तुम कहीं ट्रैफ़िक में फँस गए हो। लेकिन बहुत इंतज़ार के बाद जब तुम्हारा ड्राइवर तुम्हारा पत्र तथा सुंदर उपहार लेकर आया तब पता चला कि अचानक अस्वस्थ हो जाने के कारण तुम नहीं आ पाए।
उपहार में जो तुमने इतना सुंदर 'पेन-सेट' भेजा है, वह मेरे लिए बहुत कीमती है। मैं तुम्हें विश्वास दिलाता हूँ कि इसका इस्तेमाल करके मैं अपने जीवन में उन्नति के शिखर पर पहुँचकर दिखाऊँगा।
पुनः हृदय से तुम्हें आभार व्यक्त करता हूँ और आशा करता हूँ कि स्वस्थ होते ही तुम मिठाई खाने अवश्य आओगे।
अपने मम्मी-पापा को मेरा प्रणाम निवेदित करना।

तुम्हारा अभिन्न मित्र
देव

3. अपनी सखी को उसके जन्म-दिवस पर एक बधाई पत्र लिखिए। 5 अंक

वसंत एपार्टमेंट्स,
वसंत कुंज,
नई दिल्ली।
30 अगस्त, 20........

प्रिय सखी नीलिमा,
सस्नेह नमस्कार ।

आज ही तुम्हारा पत्र प्राप्त हुआ। यह जानकर अत्यंत प्रसन्नता हुई कि तुम्हारा जन्मदिन 5 दिसंबर को है। इस अवसर पर तुमने मुझे भी आमंत्रित किया है, उसके लिए धन्यवाद ।
मैं इस अवसर पर ज़रूर आती, लेकिन कुछ कारण से उपस्थित होना संभव नहीं है। इस समय मेरे पिता जी अस्वस्थ हैं। मैं अपनी शुभकामनाएँ भेज रही हूँ। ईश्वर से प्रार्थना है कि वे तुम्हें चिरायु प्रदान करें। अगले वर्ष जन्मदिन पर अवश्य आऊँगी । एक छोटी-सी भेंट भेज रही हूँ। आशा है, तुम्हें पसंद आएगी। अपने माता-पिता को मेरी ओर से प्रणाम बोलना तथा बिट्टू को प्यार ।
तुम्हारी प्रिय सखी
निकिता

4. बड़े भाई के विवाह का निमंत्रण देते हुए अपने मित्र को एक पत्र। 5 अंक

44, राजेंद्र मार्ग
उज्जैन
दिनांक: 28 अक्टूबर 2021

प्रिय प्रणव,
सस्नेह!
तुम्हें यह जानकर प्रसन्नता होगी कि मेरे बड़े भाई का विवाह 16 नवंबर 20xx को होना निश्चित हुआ है। तुम्हें यह तो मैं अपने पिछले पत्र में बता ही चुका हूँ कि मेरे बड़े भैया ने पिछले साल 'कंप्यूटर इंजीनियरिंग' का कोर्स पूरा कर लिया था और तभी से वे बेंगलुरु की एक आई०टी० कंपनी में नौकरी कर रहे थे। मेरी होने वाली भाभी बेंगलुरु के कॉलेज में लेक्चरर हैं।
इस विवाह में तुम्हें और तुम्हारे परिवार के सभी लोगों को अवश्य शामिल होना है। मेरे मम्मी-पापा भी निवेदन कर रहे हैं कि आप सब लोग विवाह में अवश्य उपस्थित हों।
अपने मम्मी-पापा से मेरी ओर से कहना कि अभी से ही आरक्षण करा लें जिससे उस समय कठिनाई न हो। तुम तो जानते ही हो कि हमारे घर की यह पहली शादी है। शादी के अवसर पर बहुत से काम होंगे। मुझे आशा है कि तुम एक-दो दिन पहले आ जाओगे और काम में मेरा हाथ बटाओगे। शेष सब आनंद है। पत्र के उत्तर की प्रतीक्षा में।
तुम्हारा अपना
क. ख. ग.

5. अपने पिता जी को कुछ रुपए भेजने के लिए पत्र लिखिए। 5 अंक

सरोजिनी छात्रावास
इलाहाबाद
दिनांक 16 अक्तूबर 2021

पूजनीय पिता जी,
सादर चरण स्पर्श,
पिछले कई दिनों से मैं आपको पत्र लिखने के लिए सोच रही थी, परंतु पढ़ाई में व्यस्त रहने तथा थोड़ा अस्वस्थ होने के कारण पत्र न लिख सकी। मेरी परीक्षा अगले माह से प्रारंभ होने वाली है।
पिता जी! मुझे परीक्षा के लिए कुछ पुस्तकें खरीदनी हैं तथा दो मास की फीस भी देनी है। परीक्षा के बाद हमारी कक्षा के सभी छात्र-छात्राएँ दिल्ली भ्रमण की योजना बना रहे हैं। हमारे कक्षा अध्यापक भी हमारे साथ जाएँगे। मेरी इच्छा है कि मैं भी इस बार विद्यालय के इस भ्रमण में सम्मिलित होऊँ। यदि आप अनुमति दें, तो मैं भी अपना नाम भ्रमण पर जाने वाले छात्रों की सूची में लिखवा लूँ।
आपसे प्रार्थना है कि इस मास अतिरिक्त धन राशि के रूप में कम से कम एक हज़ार रुपए मनीआर्डर द्वारा शीघ्र
भेज दें।
माता जी, चाचा जी, चाची जी को चरण स्पर्श और नीलू व नेहा को प्यार ।
आपकी आज्ञाकारिणी पुत्री
नीलिमा

6. वाद-विवाद प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर मित्र को बधाई पत्र 5 अंक

612 विकास पुरी
नई दिल्ली
दिनांक …………….

प्रिय मित्र प्रणव
सप्रेम नमस्ते

तुम्हारा पत्र मिला। सभी समाचार ज्ञात हुए। यह जान कर अत्यंत हर्ष हुआ कि तुमने अंतर्विद्यालय प्रतियोगिता में भाग लेकर प्रथम स्थान प्राप्त किया है। मित्र, तुम्हें हार्दिक बधाई तुमने आत्म-विश्वास एवं लगन का जो परिचय दिया है, उसके पीछे तुम्हारा कठिन परिश्रम एवं दृढ़ संकल्प है, जिसने तुम्हें विजय का अनुगामी बनाया है। मित्र, मुझे आशा ही नहीं, विश्वास है कि तुम आगामी प्रतियोगिताओं में इसी तरह भाग लेकर अपना, अपने माता-पिता एवं विद्यालय का नाम रोशन करोगे। मेरे माता-पिता भी तुम्हें बधाई दे रहे हैं। मेरी शुभकामनाएँ सदैव तुम्हारे साथ हैं। पत्रोत्तर की प्रतीक्षा में
तुम्हारा शुभाकांक्षी
देव

7. आपका मित्र अनिल बीमारी के कारण परीक्षा नहीं दे पाया, इससे वह निराश है। उसका हौसला बढ़ाते हुए सहानुभूति पत्र। 5 अंक

24, पूसा रोड
नई दिल्ली
दिनांक : 10 मई 2021

प्रिय मित्र प्रणव

आज ही मुझे तुम्हारी छोटी बहन ने फ़ोन पर बताया कि वार्षिक परीक्षा प्रारंभ होने से पूर्व तुम बीमार पड़ गए और परीक्षा में नहीं बैठ पाए। दोस्त! यह सब भाग्य की बात है। भाग्य के आगे किसकी चल पाती है? मैं जानता हूँ कि तुम इससे काफ़ी निराश होगे, पर तुम जैसे बालक के लिए एक साल का नुकसान कोई नुकसान नहीं है। मैं जानता हूँ कि तुम अगले साल और भी परिश्रम से इस परीक्षा में बैठोगे और कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करोगे। बस तुम्हें हिम्मत और हौसला बनाए रखना होगा क्योंकि जो कुछ होता है, सब ईश्वर की इच्छा से होता है। मैं दशहरे की छुट्टियों में तुमसे मिलने आऊँगा। आदरणीय चाचा जी एवं चाची जी को प्रणाम।

तुम्हारा अभिन्न मित्र
देव

8. विज्ञान और सामाजिक विज्ञान की पुस्तकें खरीदने हेतु रुपये मँगवाने के लिए पिता जी को पत्र । 5 अंक

डी०पी०एस० छात्रावास
नई दिल्ली
दिनांक : 04 नवंबर 2021
पूज्य पिता जी
सादर चरणस्पर्श मैं यहाँ कुशल से हूँ तथा आशा करता हूँ कि आप लोग भी सकुशल होंगे। मेरी पढ़ाई ठीक चल रही है। मैं पढ़ाई के अलावा खेल-कूद संबंधी कार्यक्रमों में भी भाग ले रहा हूँ। परंतु आपको विश्वास दिलाना चाहता हूँ कि खेल-कूद में भाग लेने के कारण मेरी पढ़ाई बिलकुल बाधित नहीं होगी।
आपने गत माह जो रुपये मेरे खाते में ट्रांसफ़र किए थे, वे सब विद्यालय शुल्क, छात्रावास शुल्क आदि में व्यय हो गए हैं। हमारे विज्ञान तथा सामाजिक विज्ञान के अध्यापकों ने पाठ्यपुस्तकों के अलावा कुछ अतिरिक्त पुस्तकों को खरीदने के निर्देश दिए हैं। इन पुस्तकों के लिए कुछ रुपयों की आवश्यकता होगी। आपसे अनुरोध है कि यथाशीघ्र एक हजार रुपये मेरे खाते में जमा करने की कृपा करें।
आदरणीया माँ को चरणस्पर्श
आपका बेटा
क. ख. ग.

9. सहेली की बड़ी बहन का दाखिला मेडिकल में हो गया है। इस सफलता के संदर्भ में एक बधाई पत्र। 5 अंक

परीक्षा भवन
नई दिल्ली
दिनांक : 20 जनवरी 20xx

प्रिय रागिनी
सस्नेह!

कल तुम्हारे पत्र से जब यह समाचार मिला कि तुम्हारी बड़ी दीदी का दाखिला लखनऊ मेडिकल कॉलेज में हो गया है तो हमारे घर में भी प्रसन्नता का माहौल छा गया। अनीता दीदी तो शुरू से ही बहुत मेहनती थीं। पढ़ाई के अलावा और कुछ उनको रुचता ही न था। उनकी मेहनत रंग लाई और उनका भविष्य सुरक्षित हो गया। मेरी ओर से तथा मेरे परिवार के सभी सदस्यों की ओर से अनीता दीदी को बहुत-बहुत बधाइयाँ
अनीता दीदी के इस शुभ समाचार से मेरी बड़ी दीदी को भी बहुत प्रेरणा मिली है। वे भी अगले साल मेडिकल की प्रवेश परीक्षा में बैठेंगी। उन्होंने भी संकल्प लिया है कि अनीता दीदी की तरह वे भी परिश्रम करेंगी। देखो क्या होता है? शेष सब सामान्य है। अपने मम्मी-पापा और अनीता दीदी को मेरी ओर से प्रणाम निवेदित करना। शेष कुशल है। पत्र लिखती रहना।

तुम्हारी प्रिय सखी
निकिता

अब हम पत्रों के दूसरी प्रकार औपचारिक पत्रों के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे

2. औपचारिक पत्र:

ऐसे पत्र जो सरकारी कर्मचारियों, अधिकारियों, दुकानदारों, प्रकाशकों आदि को लिखे जाते हैं, ये पत्र औपचारिक संदर्भों में लिखे जाते हैं। जिन लोगों के साथ इस तरह का पत्राचार किया जाता है, उनके साथ हमारे व्यक्तिगत संबंध नहीं होते। हम उन्हें जानते तक नहीं हैं। औपचारिक परिवेश होने के कारण इन पत्रों में तथ्यों और सूचनाओं को अधिक महत्त्व दिया जाता है। औपचारिक पत्रों के निम्नलिखित अंग होते हैं:

1. शीर्ष: इसके अंतर्गत पत्र के ऊपरी भाग में बाई ओर प्रेषक अपना पता लिखता है। परीक्षा भवन में यदि इस तरह के पत्र लिखे जाने का निर्देश दिया गया हो तो छात्र पते के स्थान पर केवल 'परीक्षा भवन तथा नगर का नाम ही लिखेंगे; जैसे परीक्षा भवन

………. विद्यालय
दिल्ली / बनारस / मुंबई आदि

2. पत्र प्राप्तकर्ता का संक्षिप्त पता: शीर्ष के ठीक नीचे पत्र प्राप्त करने वाले का पता लिखा जाना चाहिए। सामान्यतः इसे तीन पंक्तियों में लिखा जाता है; जैसे

संपादक
नवभारत टाइम्स
आई०टी०ओ०, नई दिल्ली

प्रधानाचार्य
मानव रचना विद्यालय
फरीदाबाद

प्रबंधक
अरु प्रकाशन
दरियागंज, दिल्ली

3. संबोधन: प्राप्तकर्ता के पते के ठीक नीचे संबोधन लिखा जाता है। औपचारिक पत्रों में प्रायः महोदय/ महोदया, मान्यवर, श्रीमान आदि संबोधन लिखे जाते हैं।

4. पत्र का कलेवर: पत्र का कलेवर औपचारिक पत्रों का सबसे प्रमुख भाग होता है। इसे तीन भागों में बाँटकर लिखा जा सकता है- (क) प्रारंभ यदि पत्र पहली बार लिखा जा रहा है तो प्रारंभिक वाक्य परिचयात्मक होंगे।
यदि किसी पत्र के उत्तर में लिखा जा रहा है, तो पूर्व पत्र की संख्या, तिथि, विषय आदि का संदर्भ बताते हुए पत्र लिखना होगा।
(ख) मध्य मध्य में पत्र लेखक उन सब बातों का उल्लेख करेगा, जिन्हें वह पत्र प्रेषित करना चाहता है।
(ग) अंत/समापन यह पूरे पत्र का निष्कर्ष होता है। अतः जो कुछ पत्र के मध्य भाग में लिखा गया है, उसी का सार या संक्षिप्त रूप यहाँ एक दो पंक्तियों में आना चाहिए। समापन के वाक्य इस प्रकार के हो सकते हैं:
बिजली मीटर बदलवाए जाने का आदेश तत्काल जारी करें।

अपेक्षित पुस्तकों को तत्काल भिजवाने की व्यवस्था करें।
विषयवस्तु या मूल कथ्य शिष्टाचार सूचक शब्दों के बाद पत्र की मूल विषयवस्तु आती है। इसे पत्र का : कथ्य भी कहते हैं। इसके अंतर्गत लेखक वे सभी बातें, विचार आदि व्यक्त करता है, जिन्हें वह पाठक तक संप्रेषित करना चाहता है। इसी के अंतर्गत लेखक की अभिव्यक्ति क्षमता, भाषा, कथ्य को प्रस्तुत करने का तरीका आदि का पता चलता है।

समापन: निर्देश या स्वनिर्देश: कथ्य की समाप्ति के पत्र के समापन की बारी आती है। पत्र-समापन से पहले आत्मीय जनों के विषय में पूछताछ, आदर-सम्मान आदि का भाव व्यक्त किया जाता है। अंत में 'स्वनिर्देश' के अंतर्गत पत्र लेखक तथा पाठक के मध्य के संबंधों के आधार पर संबंधसूचक शब्दों का प्रयोग किया जाता है; जैसे

आपका...
आपका ही...
तुम्हारा अपना
स्नेहाकांक्षी... आदि।
पत्र का उत्तर तत्काल भेजें।
हमारे अनुरोध पर जो भी कारवाई की गई हो उससे तत्काल अवगत कराएँ।

5. स्वनिर्देश: पत्र के मुख्य कलेवर के बाद नीचे 'स्वनिर्देश' लिखा जाना चाहिए। व्यावसायिक पत्रों में गिने-चुने स्वनिर्देश लिखे जाते हैं; जैसे-'भवदीय', 'उत्तरापेक्षी', 'आपका' आदि।

6. हस्ताक्षर: स्वनिर्देश के ठीक नीचे पत्र भेजने वाला अपने हस्ताक्षर करता है तथा हस्ताक्षरों के ठीक नीचे कोष्ठक में अपना नाम भी लिखता है।
परीक्षा भवन से भेजे गए पत्रों में छात्र न तो हस्ताक्षर ही करेंगे और न नाम ही लिखेंगे। वे क.ख.ग./ अ.ब.स. लिख सकते हैं।

7. दिनांक: हस्ताक्षर के नीचे दिनांक लिखा जाता है।
उपर्युक्त अंगों के अतिरिक्त औपचारिक पत्रों में दो अंग और हो सकते हैं

1. पत्र संख्या: जो भी पत्र भेजा जा रहा है, उसकी संख्या, फाइल संख्या आदि लिखी जाती है, जिससे उत्तर देने वाला पत्र का संदर्भ दे सके। पत्र संख्या प्रेषक के नाम और पते के बाद बाई ओर लिखी जानी चाहिए।
2. संलग्नक औपचारिक पत्रों के साथ अनेक प्रकार के संलग्नक लगाए जाते हैं। ये प्रमाण पत्रों, रसीदों, बिलों, चेक-ड्राफ्ट आदि की फोटो प्रतियाँ हो सकती हैं।
संलग्नक शीर्षक लिखकर संक्षेप में जो भी सामग्री संलग्न की जा रही है उसका विवरण दिया जाता है; जैसे
संलग्नक :
प्रमाण पत्रों की फोटो प्रति
चेक संख्या की फोटो प्रति
कर जमा कराए जाने की रसीद की फोटो प्रति आदि।

अनौपचारिक पत्र का प्रारूप:
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अनौपचारिक पत्रों के प्रकार:

औपचारिक पत्र प्राय: चार प्रकार के होते हैं:

  1. आवेदन पत्र प्रार्थना पत्र
    • प्रधानाचार्य/मुख्याध्यापक को पत्र
    • नौकरी के लिए आवेदन पत्र
  2. शिकायती पत्र:
    • विभिन्न सरकारी/ अर्धसरकारी संस्थाओं को पत्र
    • संपादक के नाम पत्र
  3. व्यावसायिक पत्र
  4. सरकारी पत्र

1. आवेदन पत्र: आवेदन पत्र को लिखते समय ध्यान देने योग्य बातें-
प्रायः ये पत्र किसी उच्चाधिकारी को लिखे जाते हैं, अतः इनमें शिष्टता का प्रदर्शन किया जाना चाहिए।
अधिकारियों के पास समय की कमी तथा उनकी व्यस्तता को ध्यान में रखकर पत्र संक्षिप्त होने चाहिए।
पत्र में सारी बातों को समाहित करना चाहिए। ध्यान रखना चाहिए कि कोई तथ्य छूट न जाए।
पत्र तथ्यों पर आधारित होने चाहिए। तथ्यों की पुष्टि के लिए प्रमाण भी संलग्न किए जाने चाहिए।

2. शिकायती पत्र: शिकायती पत्रों में अपने आसपास के परिवेश में घटित होने वाली घटनाओं के संबंध मे उच्चाधिकारियों को शिकायत की जाती है।

3. व्यावसायिक पत्र: विभिन्न व्यवसायियों द्वारा सामान की खरीद-फरोख्त के लिए इस तरह के पत्र लिखे जाते हैं। अनेक व्यावसायिक संस्थान भी एक-दूसरे को इस तरह के पत्र भेजते हैं। व्यावसायिक पत्रों में निम्नलिखित विशेषताएँ होनी चाहिए 1. स्पष्टता, 2. संक्षिप्तता 3. शिष्टता 4. पूर्णता, 5. प्रभावोत्पादकता

4. सरकारी पत्र: इनको शासकीय पत्र भी कहते हैं। इस तरह के पत्र सरकारी कार्यालयों द्वारा विभिन्न विभागों, सरकारी संस्थाओं, राज्य सरकारों आदि के बीच लिखे जाते हैं।

औपचारिक पत्रों के उदाहरण:

साथ ही नीचे औपचारिक पत्रों उदाहरण भी दिए गए हैं जिन्हें हल भी किया गया हैI यह महत्वपूर्ण पत्र हैं जो वार्षिक परीक्षा में पूछे जा सकते हैंI विद्यार्थी इन का अभ्यास करेंI

1. फ़ीस माफ़ी के लिए अपने प्रधानाचार्य को पत्र 5 अंक

सेवा में
श्रीमान् प्रधानाचार्य महोदय
विषय: फ़ीस माफ़ी के लिए पत्र
मान्यवर महोदय
सविनय निवेदन है कि मैं आपके स्कूल में कक्षा सातवीं 'अ' की छात्रा हूँ। मेरा छठी कक्षा में सभी वर्गों में प्रथम में स्थान था। विद्यालय में होने वाली अन्य प्रतियोगिताओं में मैंने पुरस्कार लिए है। मेरे पिताजी एक साधारण से स्कूल में चपरासी हैं, हम पढ़ने वाले चार भाई-बहन हैं। घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। मैं अपनी पढ़ाई आगे जारी रखना चाहती हूँ। कृपा कर मेरी 'फ़ीस माफ़' करवा दें। मैं सदा आपकी आभारी रहूँगी। धन्यवाद सहित

आपकी आज्ञाकारिणी शिष्या
निकिता
कक्षा सातवीं ' ब '
दिनांक:

2. विद्यालय छोड़ने का प्रमाण-पत्र लेने के लिए प्रधानाचार्य को पत्र । 5 अंक

परीक्षा भवन
नई दिल्ली
प्रधानाचार्य
डी०ए०वी० स्कूल
सरिता विहार, नई दिल्ली

विषय : विद्यालय छोड़ने का प्रमाण-पत्र दिए जाने के संबंध में।
महोदय,
सूचनार्थ निवेदन है कि मैं आपके विद्यालय का छात्र हूँ तथा नौवीं कक्षा उत्तीर्ण करके दसवीं में आया हूँ। मेरे पिता जी केंद्र सरकार के कर्मचारी हैं। उनका स्थानांतरण शिलांग हो गया है। मेरा परिवार अगले माह शिलांग शिफ्ट कर रहा है। मैं भी वहीं के केंद्रीय विद्यालय में प्रवेश लूँगा।
अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि मुझे विद्यालय छोड़ने का प्रमाण पत्र देने की कृपा करें। मैं आपके विद्यालय में गत पाँच वर्षों से अध्ययन कर रहा था। यहाँ के अध्यापकों से मुझे जो मार्गदर्शन मिला तथा साथियों से जो स्नेह मिला है, उसे मैं कभी नहीं भूल पाऊँगा।
सधन्यवाद!

भवदीय
क. ख. ग.
कक्षा- नौवीं-ब
दिनांक

3. प्रधानाचार्य को छात्रवृत्ति के लिए आवेदन पत्र 5 अंक

प्रतिष्ठार्थ
माननीय प्रधानाचार्य,
कालका पब्लिक स्कूल,
नई दिल्ली।

विषय: छात्रवृत्ति के लिए आवेदन पत्र ।
महोदय,
आप के कथनानुसार किसी भी विषय में नब्बे प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वालों को छात्रवृत्ति दी जाएगी। मैं आपके विद्यालय का कक्षा सातवीं का छात्र हूँ। मेरे वार्षिक परीक्षा में 85 प्रतिशत अंक आए हैं तथा गणित, विज्ञान और संस्कृत में क्रमश: 90, 92 एवं 96 प्रतिशत अंक हैं। इसके अतिरिक्त में निरंतर सह-शैक्षणिक गतिविधियों में भी भाग लेता रहा हूँ। मैने अंतः विद्यालय वाद-विवाद प्रतियोगिता में भी भाग लिया तथा प्रथम स्थान प्राप्त किया। पिछले वर्ष भी मुझे छात्रवृत्ति मिल रही थी।
आशा है आप मेरी योग्यताओं को ध्यान में रखकर छात्रवृत्ति प्रदान करेंगे। मैं आपका सदैव आभारी रहूँगा।
आपका आज्ञाकारी शिष्य,

प्रणव
कक्षा-सात (अ)
अनुक्रमांक 10
दिनांक 19 अप्रैल, 2021

4. आपके विद्यालय में खेल के सामान की कमी है, इसके विषय में प्रधानाचार्य को एक पत्र लिखिए। 5 अंक

प्रतिष्ठार्थ
प्रधानाचार्य महोदय,
रामजस विद्यालय,
नई दिल्ली ।
महोदय,

सविनय निवेदन है कि इस वर्ष खेल के पीरियड में खेलने के लिए किसी प्रकार का सामना नहीं मिल पा रहा है । खेल-कूद अध्यापक से पूछने पर मालूम हुआ है कि पिछले दो वर्षों से खेल-कूद का सामान खरीदा ही नहीं गया है । आपसे हमारी प्रार्थना है कि खेल-कूद के सामानों की व्यवस्था शीघ्र करवा दें, जिससे हम अंतःविद्यालय मैचों के लिए अभ्यास कर सकें। पिछले वर्ष हमारी फुटबॉल टीम प्रथम आई थी। इस वर्ष भी हमारा यही प्रयास है, परंतु सामान न मिलने के कारण कठिनाई हो रही है तथा अभ्यास न करने के कारण खिलाड़ियों का मनोबल टूट रहा है।
आशा है, आप अतिशीघ्र खेल-कूद का सामान मँगवाने का कष्ट करेंगे तथा हम खिलाड़ियों का मनोबल टूटने से बचाएँगे, जिससे इस वर्ष भी हम प्रथम स्थान प्राप्त कर सकें ।

सधन्यवाद,
आपका आज्ञाकारी शिष्य,
क०ख०ग०

5. चिकित्सावकाश पर रहने के लिए प्रधानाचार्य को पत्र। 5 अंक

परीक्षा भवन नई दिल्ली
प्रधानाचार्य
डी०ए०वी० स्कूल फरीदाबाद
विषय: चिकित्सावकाश पर रहने हेतु आवेदन।

माननीय महोदय
विनम्र निवेदन है कि मुझे अचानक वायरल बुखार हो गया है। तेज बुखार तो है ही, साथ ही बदन में बहुत द है। डॉक्टर ने पाँच दिन तक आराम करने की सलाह दी है। अनुरोध है कि 10.3.3Xxx से 15.3.20xx तक पाँच दिन का चिकित्सावकाश देने की कृपा करें। डॉक्टर का चिकित्सा प्रमाण-पत्र स्वस्थ होने के बाद स्कूल आने पर कार्यालय में जमा करा दूंगा।
सधन्यवाद!

भवदीय
क. ख. ग.
कक्षा-'दसवीं-ब'
दिनांक : 10 मार्च 2021

6. विद्यालय की विज्ञान प्रयोगशाला को अत्याधुनिक बनाने की आवश्यकता समझाते हुए विद्यालय प्रधानाचार्य को पत्र । 5 अंक

परीक्षा भवन
नई दिल्ली
प्रधानाचार्य
ज्ञान भारती स्कूल,
साकेत, नई दिल्ली
विषय: विज्ञान प्रयोगशाला को अत्याधुनिक बनाए जाने हेतु।

माननीय महोदय
मैं आपके विद्यालय में कक्षा दसवीं-ब' का छात्र हूँ। सर आप जानते ही हैं कि हमारे विद्यालय का पूरे इलाके में बड़ा नाम है। यहाँ छात्रों को केवल शिक्षा ही नहीं दी जाती बल्कि उनके उज्ज्वल चरित्र निर्माण के लिए हर संभव कोशिश की जाती है। हमारे विद्यालय का परीक्षा परिणाम भी अच्छा रहता है परंतु मैं आपका ध्यान विद्यालय की विज्ञान प्रयोगशाला की ओर आकृष्ट करना चाहता हूँ। हमारी प्रयोगशाला विद्यालय के स्तर की कदापि नहीं है। जो आधुनिक उपकरण किसी प्रयोगशाला को स्तरीय बनाते हैं, उनकी अत्यंत आवश्यकता है। महोदय, आप स्वयं विज्ञान के विद्यार्थी रहे हैं। आपको प्रयोगशाला संबंधी सुझाव देना सूरज को दीपक दिखाने के समान होगा। मेरा आपसे विनम्र निवेदन है कि आप इस ओर थोड़ा ध्यान देने की कृपा करें तथा विज्ञान प्रयोगशाला से संबद्ध कर्मियों को आदेश दें कि वे इसे अत्याधुनिक बनाने हेतु कारवाई करें।
आपका आज्ञाकारी शिष्य

अबस
कक्षा सातवीं 'ब'

7. चरित्र प्रमाण-पत्र प्रदान करने हेतु अपने विद्यालय के प्रधानाचार्य को पत्र लिखो।5 अंक

सेवा में
श्रीमान् प्रधानाचार्य महोदय
ज्ञान भारती स्कूल,
इलाहाबाद

विषय: चरित्र प्रमाण-पत्र हेतु
महोदय
सविनय निवेदन है कि मैं कक्षा सातवीं 'अ' का विद्यार्थी हूँ। मेरे पिताजी का स्थानांतरण मुंबई हो गया है। इसलिए मुझे विद्यालय छोड़ने के प्रमाण-पत्र के साथ-साथ चरित्र प्रमाण-पत्र की भी आवश्यकता है। अतः आपसे निवेदन है कि मुझे चरित्र प्रमाण-पत्र बना कर दें जिसमें मेरी शैक्षणिक योग्यताओं के अतिरिक्त खेल संबंधी उपलब्धियों का भी उल्लेख हो। आपकी अति कृपा होगी।

सधन्यवाद
भवदीय
प्रणव वर्मा
दिनांक : 10 अगस्त 2021

8. पुस्तक विक्रेता से पुस्तकें मँगवाने के लिए पत्र।5 अंक

32, माल रोड
नसूरी, उत्तरांचल
दिनांक

सेवा में
भात पब्लिशिंग हाउस
2231/2 डोरी वालान
करोल बाग, दिल्ली-5
मान्यवर
कल प्रगति मैदान में मेले से आपका सूची पत्र मिला। मुझे निम्नलिखित पुस्तकों की शीघ्र आवश्यकता है। मैं 200 रूपये अग्रिम भेज रहा हूँ कृपया पुस्तकें वी. पी. पी. द्वारा शीघ्र उपर्युक्त पते पर भिजवाने का प्रबंध करें। उचित कमीशन काटकर बिल भी साथ भेज दें।

  1. मानक व्याकरण व्यवहार (भाग-2) 3 प्रतियाँ
  2. ज्ञान वर्षा भाग-4 2 प्रतियाँ
  3. मानक व्याकरण व्यवहार (भाग-1) 4 प्रतियाँ
  4. मानक व्याकरण व्यवहार (तृतीय पुष्प) 4 प्रतियाँ
धन्यवाद सहित

9. आपने समाचार पत्र में एक कंप्यूटर कोर्स का विज्ञापन पढ़ा। उस कोर्स को चलाने वाली संस्था के प्रबंधक को तथा कोर्स के विषय में विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के लिए पत्र ।5 अंक

परीक्षा भवन
इलाहाबाद
दिनांक : 3 मार्च 2021

सेवा में,
प्रबंधक
कंप्यूटर प्रशिक्षण संस्थान
गांधी रोड, इलाहाबाद
विषय: द्विवर्षीय कंप्यूटर हार्डवेयर पाठ्यक्रम के विषय में।
महोदय
'हिंदुस्तान टाइम्स' में आपकी संस्था द्वारा चलाए जाने वाले 'द्विवर्षीय कंप्यूटर हार्डवेयर पाठ्यक्रम' के संबंध में पढ़ा था। मैं उक्त पाठ्यक्रम के विषय में निम्नलिखित जानकारियाँ प्राप्त करना चाहता हूँ

  1. पाठ्यक्रम किस तारीख से प्रारंभ होने जा रहा है?
  2. पाठ्यक्रम की प्रति सेमेस्टर फ़ीस कितनी है?
  3. प्रवेशार्थी की न्यूनतम शैक्षिक योग्यता क्या होनी चाहिए?
  4. क्या प्रवेश के लिए कोई 'प्रवेश परीक्षा' तो नहीं देना?
  5. पाठ्यक्रम किस समय से किस समय तक चलाया जाएगा?
  6. अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए फ़ीस में छूट का प्रावधान है या नहीं?
  7. छात्रों के आवास से संस्थान तक आने-जाने के लिए संस्था की ओर से कोई वाहन की व्यवस्था है या नहीं? अनुरोध है कि पाठ्यक्रम से संबंधित सभी जानकारियाँ लिखित रूप से भिजवाने की कृपा करें।

सधन्यवाद!
भवदीय
क.ख.ग.

10. आपके इलाके में डाक-वितरण ठीक प्रकार से नहीं हो रहा है। अपने क्षेत्र के पोस्ट-मास्टर को ठीक तरह से डाक वितरित किए जाने के संबंध में पत्र । 5 अंक

30, मयूर विहार,
फेज-II,
नई दिल्ली

पोस्ट-मास्टर महोदय
मयूर विहार मुख्य पोस्ट ऑफ़िस
मयूर विहार, नई दिल्ली

विषय: डाक-वितरण संबंधी अव्यवस्था की शिकायत
महोदय
सूचनार्थ निवेदन है कि मेरे इलाके में लोगों को डाक समय पर नहीं मिल रही है। कल ही मुझे दो माह पूर्व लिखे गए कुछ पत्र प्राप्त हुए हैं। सभी पत्र स्थानीय लोगों ने भेजे हैं। स्थानीय डाक को पहुँचने में दो माह लग जाएँ, ऐसी संभावना कम ही है। यह डाकिए की अनियमितता का परिणाम भी हो सकता है या इसका कोई अन्य कारण भी हो सकता है।
आपसे मेरी प्रार्थना है कि इसकी जाँच करवाएँ तथा संबद्ध कर्मचारियों को निर्देश दें जिससे हमारे इलाके के सभी लोगों को समय से डाक मिलती रहे। इस कार्य के लिए मैं आपका आभारी रहूँगा।

सधन्यवाद!
भवदीय
प्रणव नायक
दिनांक : 14 अगस्त 2021

11. आपके मुहल्ले की नालियों की ठीक से सफ़ाई नहीं हो रही है। इसकी शिकायत करते हुए नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी को पत्र 5 अंक

54. मयूर विहार फेज-1
नई दिल्ली

स्वास्थ्य अधिकारी
दिल्ली नगर निगम
नई दिल्ली,

विषय: मोहल्ले की नालियों की सफाई हेतु

महोदय
आपका ध्यान मयूर विहार फेज-I की शोचनीय स्थिति की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ। इस क्षेत्र में व्यवस्था कितनी खराब है आप अनुमान नहीं लगा सकते। जगह-जगह कूड़े-कचरे के ढेर इकट्ठे हो गए है और इलाके के लोगों का दुर्गंध के कारण रहना दूभर हो गया है। नालियाँ कचरे से भर गई है और गंदा पानी सड़क पर बह रहा है। चारों ओर मच्छरों का बोलबाला है। अतः इस क्षेत्र में मलेरिया बहुत तेजी से फैल रहा है, जिसके कारण सभी निवासी आतंकित है।
सफाई को लेकर बस्ती के लोगों ने कई बार स्थानीय स्वास्थ्य निरीक्षक से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन सज्जन तो अपने कार्यालय में दिखाई ही नहीं देते हैं। अत: विवश होकर मैं समस्त बस्ती वालों की ओर से पत्र लिख रहा हूँ।
आशा है आप इस संबंध में अपेक्षित निर्णय लेंगे और स्वयं इस क्षेत्र का दौरा करेंगे।
इस बस्ती के सभी लोग आपके आभारी रहेंगे।

सधन्यवाद।
भवदीय
क.ख..
दिनांक : 15 मई 2021

अनौपचारिक पत्र का प्रारूप:

अभ्यासार्थ आपको कुछ प्रश्न औपचारिक एवं अनौपचारिक पत्र ऊपर नीचे दिए जा रहे हैं इन्हें हल करने का प्रयास करें। 5 अंक

  1. मनपसंद पुस्तके खरीदने के लिए पिताजी को पत्र लिखकर पैसे भेजने का अनुरोध करें।
  2. अपने मामा जी को जन्म दिन पर भेजे गए उपहार के लिए धन्यवाद देते हुए पत्र लिखिए।
  3. प्रधानाचार्य को बहिन के विवाह हेतु दो दिन के अवकाश के लिए पत्र लिखिए।
  4. माता जी को पत्र लिखकर अपने कार्यक्रम के बारे में सूचित कीजिए कि आप विद्यालय की ओर से माता वसुध शिमला-भ्रमण के लिए जा रहे हैं।
  5. किसी समाचार पत्र के संपादक को पत्र लिखिए जिसमें अपनी रचनाओं को छापने का अनुरोध कीजिए। (ङ) अपने क्षेत्र में बढ़ती गंदगी की ओर ध्यान दिलाते हुए स्वास्थ्य अधिकारी को पत्र लिखिए।
  6. आपके पिता जी का स्थानांतरण हो गया है। अतः विद्यालय से स्थानांतरण प्रमाण-पत्र प्राप्त करने हेतु प्रधानाचार्य को पत्र लिखिए।
  7. दूरदर्शन अधिकारी को पत्र लिखिए जिसमें बच्चों के अधिक-से-अधिक कार्यक्रम दिखाने का अनुरोध किया गया हो।
  8. दो पाठ्य-पुस्तके वी. पी. पी. से मँगाने के लिए क ख ग प्रकाशन, दरियागंज को पत्र लिखें।
Website Link: www.mynewclassroom.in थैंक्यू। बेस्ट ऑफ लक।
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